"मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना का औचित्य"

"मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना का औचित्य"

 हिमाचल प्रदेश के रोजगार कार्यालयों में करीब 8.34 लाख रोजगार के लिए पंजीकृत है। हर वर्ष दो लाख युवा नौकरियां प्राप्त करने के लिए अपना पंजीकरण करवाते हैं। क्या इन युवाओं को सरकारी क्षेत्र में रोजगार मिल पाएगाl कोरोना जैसी महामारी ने जहां युवाओं का निजी क्षेत्र से भी रोजगार छीन लिया तो क्या ऐसी परिस्थिति में हिमाचल प्रदेश सरकार इतनी बड़ी तादाद में सरकारी कार्यालयों में रजिस्टर्ड युवाओं को रोजगार दे पाएगीl इस प्रश्न का हल खोजने के लिए यदि पिछले एक दशक
की सरकारों की कार्यप्रणाली पर नजर डाली जाए तो यह स्पष्ट जाहिर होता है कि प्रदेश सरकार भी युवाओं को सरकारी क्षेत्र के बजाए अपने घर द्वार के समीप सरकारी तंत्र की सहायता से स्वरोजगार के मार्ग प्रशस्त करने के अनेकों प्रयास करती दिखी है। प्रदेश सरकारों द्वारा समय-समय पर निजी क्षेत्र के उद्योगों में भी 70 से 75% रोजगार केवल हिमाचलियों को देने का प्रावधान किया है लेकिन वर्तमान में तो निजी क्षेत्र में कार्यरत अनेकों युवा अपने रोजगार को खोकर चारदीवारी में कैद होने को मजबूर हो गए हैंl विशेष तौर पर पर्यटन, होटल, टी स्टॉल, भोजनालय,ड्राइवर इत्यादि व्यवसाय से जुड़े अधिकतर युवा बेरोजगारी की भयंकर मार झेल रहे हैं। ऐसे में हिमाचल प्रदेश सरकार युवाओं के हितों को संरक्षित करने वाली मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना वरदान से कम नहीं है।

हिमाचल सरकार ने प्रदेश के युवाओं को स्वरोजगार एवं रोजगार से जोड़ने के लिए ‘‘मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना’’ शुरू की है। यह योजना 18 से 45 वर्ष के उन युवाओं के लिए शुरू की है जो उद्योग, सर्विस सेक्टर, व्यापार स्थापित करना चाहते हैं। किसी भी कार्य को शुरू करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण पूंजी होती है। यदि इन युवाओं को सही मार्गदर्शन के साथ पूंजी की व्यवस्था हो जाए तो प्रदेश का युवा वर्ग नए आयाम स्थापित कर सकता है। देश के बहुत से युवाओं के पास योग्यता तो है लेकिन पूंजी का अभाव है। ऐसे युवाओं के लिए सरकार द्वारा इस योजना के माध्यम से युवाओं को सब्सिडी पर लोन उपलब्ध करवाने की व्यवस्था की है। हिमाचल सरकार स्थानीय उद्यम को बढ़ावा देने और युवाओं को स्वरोजगार के साधन उपलब्ध करवाने की दृष्टि से  मुख्यमंत्री श्री जयराम ठाकुर द्वारा 25 मई 2018 को ‘‘मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना’’ की घोषणा की थीl इस योजना के तहत आरंभ में परियोजना लागत सीमा, जिसमें कार्यशील पूंजी 40 लाख रुपये थी, को वर्ष 2019-20 में बढ़ाकर 60 लाख रुपये किया गया है। चालू पूंजी निवेश में पूर्व निर्धारित सीमा के अनुसार योजना के तहत इकाइयों की स्थापना के लिए आवश्यक भवन और अन्य परिसंपत्तियां भी शामिल की गई हैं। सरकार निवेश/मशीनरी पर 25 प्रतिशत अनुदान प्रदान कर रही है, जबकि महिलाओं को 30 प्रतिशत अनुदान प्रदान किया जा रहा है। चालू वित्त वर्ष के बजट में सरकार ने योजना के तहत 45 वर्ष तक की आयु की विधवाओं को 35 प्रतिशत अनुदान प्रदान करने का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत 1605 मामलों को स्वीकृति प्रदान की गई है, जिसके तहत लाभार्थियों को 312 करोड़ रुपये के ऋण प्रदान किए जाएंगें। इस ऋण राशि पर 74.70 करोड़ रुपये का अनुदान प्रदान किया है।  

मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना और औद्योगिक निवेश नीति-2019 का लाभ उठाने के लिए emerginghimachal.hp.gov.in वेबसाइट पर लॉगईन करके आवेदन किया जा सकता है। आवेदन करने की प्रक्रिया बहुत ही सरल है। कुछ ही दिनों में संबंधित अधिकारी आवेदन कर्ता से संपर्क साध कर उनके प्रपोजल को स्वीकृति प्रदान करके संबंधित बैंक को लेटर जारी करके आगे की प्रक्रिया के लिए प्रेषित करते हैं। उसके बाद उम्मीदवार को संबंधित बैंक में जाकर लोन अधिकारी से मुलाकात करके आगे का डॉक्यूमेंटेशन वर्क करना होता है।  लेकिन बहुत से युवाओं को बैंकों की जटिल लोन की प्रक्रिया से गुजरने मे अनेको समस्याओं का समाधान करना पड़ता हैl बहुत से केस विभाग द्वारा स्वीकृत कर दिए जाते हैं लेकिन बैंकों द्वारा युवाओं को अनेक चक्कर लगवाए जाते हैं। बैंक  अधिकारियों की अकड़बाजी, फालतू कागजों की फॉर्मेलिटीज तथा लीगली बाइंडिंग युवाओं को इस योजना के लाभ से वंचित करती है। संबंधित विभाग के अधिकारियों को रिव्यू मीटिंग में बैंकों की इस त्रुटि को दूर करने के लिए कठोर कदम उठाने होंगे। इस योजना का मूल उद्देश्य युवा शक्ति को सरकारी तंत्र की सहायता से अति शीघ्र रोजगार उपलब्ध करवाना होता है ताकि युवा स्वरोजगार के मार्ग को अपनाकर अपना जीवन यापन कर सकेl बैंक अधिकारियों को भी यह समझना होगा कि खुद तो वे हजारों रुपए की तनख्वाह प्राप्त करते हैं और जब कभी बेरोजगार उनके दरबार पर आता है तो उनके साथ नरमी के साथ पेश आने की आदत डालनी होगी। बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों को भी बेरोजगार युवाओं कि इस मूलभूत समस्या को समझते हुए सकारात्मक नजरिया अपनाना होगा यदि प्रदेश का युवा समृद्ध  व खुशाल होगा तो हमारा यह प्रदेश स्वत: ही उन्नति के नवीन मार्गों को प्रशस्त करेगाl  

बेरोजगारी की मार और कुसंगती के मार्ग को अपनाकर युवा वर्ग नशे के मार्ग को अपना रहा है जो कि उसके जीवन को तबाह कर रहा है। प्रदेश में नशा किसी महामारी से कम नहीं हैl अच्छे व प्रतिष्ठित घरानों के युवा भी नशे की चपेट में आ चुके हैं। लॉकडाउन के बीच में भी नशीले पदार्थों के तस्करों के अनेकों मामले सामने आएl प्रदेश में आत्महत्या के केसो में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही हैl पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के मुताबिक लॉकडाउन के दौरान अप्रैल और मई महीने में ही 121 हिमाचलियों ने आत्महत्या की है। ज्यादातर मामलों में आत्महत्या करने वाले युवा ही थे। साल 2019 में कुल 563 आत्महत्या से जुड़े मामले दर्ज किए गए। इनमें सबसे ज्यादा कांगड़ा में 140 जबकि मंडी में 82, और सोलन में 67 मामले शामिल हैं।  ऐसे परिप्रेक्ष्य में क्या समाज के बुद्धिजीवियों तथा सरकारी तंत्र के आला अधिकारियों को युवाओं द्वारा उठाए जा रहे हैं इस तरह के कदमों के प्रति सचेत करने की आवश्यकता महसूस नहीं होतीl अति शीघ्र सरकार द्वारा युवाओं की मार्गदर्शन तथा स्वरोजगार के नवीन साधनों के सृजन में सरकारी सहायता से संबंधित जानकारियों को पंचायत स्तर पर विभिन्न तरह के कैंपों के माध्यम से प्रेषित करना होगा ताकि हिमाचल के छोटे से छोटे गांव का युवा वर्ग भी सरकारी तंत्र की मदद से अपने लिए रोजगार के नवीन मार्ग सृजित करने में सक्षम बन सकेl

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