अयोध्या में बन रहे हिंदू मंदिर का संबंध हिमाचल प्रदेश से किस तरह से रहा है?

अयोध्या मंदिर के निर्माण का प्रस्ताव भारतीय जनता पार्टी द्वारा कहां से पास किया था? 
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अयोध्या मंदिर के निर्माण के ऐतिहासिक फैसले की हिमाचल प्रदेश के परिप्रेक्ष्य में  विवेचना कीजिए? 

करीब 5 शताब्दियों की भक्तपिपासु  प्रतीक्षा, संघर्ष और तप के उपरांत 5 अगस्त 2020 को शुभ मुहूर्त के मध्यान्ह बाद 12:30 से 12:40 के बीच भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी करोड़ों लोगों की आस्था के प्रभु श्री रामलला के चिरअभिलाषित भव्य मंदिर की आधारशिला का सपना साकार होगाl कई वर्षों की कानूनी प्रक्रिया के बावजूद आखिरकार श्री रामलला की जन्मस्थली धर्मनगरी अयोध्या की पावन भूमि पर भव्य और दिव्य मंदिर की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हो पायाl कांगड़ा जिला से संबंध रखने वाले भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता श्री शांता कुमार द्वारा अयोध्या निर्माण मंदिर की ऐतिहासिक तथ्यों पर प्रकाश डालते हुए याद दिलाया कि इस भव्य मंदिर के निर्माण का प्रस्ताव 11 जून 1989 को भाजपा ने पालमपुर में श्री अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी जैसे दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में पास हुआ था।  

हिमाचल प्रदेश के हर कोने-कोने में श्री राम भगवान जी के आदर्श मूल्यों का समाजिक व पारिवारिक जीवन पर स्पष्ट प्रभाव देखने को मिलता है। वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक हिमाचल प्रदेश में 95.17% जनसंख्या हिंदुओं की हैै। इस समुदाय की आस्था के मंदिर में भगवान श्रीराम का निवास विद्यमान है। इस छोटे से प्रदेश में रामराज्य की प्रथाएं आज भी विद्यमान है। जब 27 दिसंबर 2017 को मंडी जिला के साधारण से परिवार से संबंध रखने वाले श्री जयराम ठाकुर जी प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो उसमें भी लोगों ने श्री जयराम ठाकुर के शासन की तुलना राम राज्य से करके श्री राम भगवान के राज्य की याद दिलाई थीl अयोध्या की भूमि से हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू का पुराना नाता रहा है। सन 1650 ई. में तत्कालीन कुल्लू के राजा जगत सिंह के आदेश पर भगवान रघुनाथ, सीता और हनुमान की मूर्तियां अयोध्या से दामोदर दास नामक व्यक्ति लाया था। रघुनाथपुर में रघुनाथ की स्थापना 1660 में की गई। दस साल तक रघुनाथ को मकराहड़ और धार्मिक स्थली मणिकर्ण में रखा गया। मणिकरण में एक राम मंदिर का निर्माण भी हुआ है जिस कारण इस भूमि को राम की नगरी भी कहा जाता है। अयोध्या में बनने जा रहे राम मंदिर के लिए प्रदेशवासियों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। विभिन्न स्थानों पर पूजा- पाठ हवन इत्यादि मंगलकामनाएं की जा रही है। मंदिर निर्माण के शुभारंभ पर प्रदेशवासी अपने घरों में दिए जलाकर भगवान राम के भव्य मंदिर के निर्माण का जश्न मनाने के लिए तत्पर है।

पिछले 6 महीनों से पूरी दुनिया कोविड-19 महामारी की प्रकोप को झेल रही है। इसी के बीच जब भारत के  प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को देश में लॉकडाउन लगाना पड़ा उसमें दूरदर्शन के चैनलों के माध्यम से रामायण का प्रसारण किया गयाl रामायण एक बहुत ही सफ़ल भारतीय टीवी श्रृंखला है, जिसका निर्माण, लेखन और निर्देशन रामानन्द सागर के द्वारा किया गया था। राष्ट्रीय चैनल के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से किए गए ट्वीट के अनुसार, 'रामायण के दोबारा प्रसारण ने दुनिया भर में दर्शकों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है और यह 16 अप्रैल को 7.7 करोड़ दर्शकों की संख्या के साथ दुनिया भर में सबसे अधिक देखा जाने वाला मनोरंजन धारावाहिक बन गयाl 1980-90 के दशक में घर-घर में अपनी पैठ बनाने वाले 'रामायण' में अरुण गोविल ने राम की भूमिका अदा की थी तो वहीं दीपिका चिखलिया ने सीता का रोल निभाया था। आज भी अरुण और दीपिका की जोड़ी पूरी दुनिया में राम और सीता के नाम से जानी जाती है। कहते हैं कि इस अभिनय को करने के बाद अरुण और दीपिका को फिल्म इंडस्ट्री में काम मिलना ही बंद हो गया थाl ये दोनों कलाकार जिस स्थान पर जाते थे वहां पर इन्हें भगवान राम तथा सीता के रूप में पूजना शुरू कर दिया जाता थाl जिस भगवान का अभिनय करने वाले लोगों को इतना सम्मान मिलता हो उस भगवान की आस्था व आदर्श कितने बहुमूल्य होंगेl

लेकिन भारत के इतिहास में लंबे समय तक भगवान राम लला के मंदिर के निर्माण को लेकर लंबा इंतजार करना पड़ाl 70 सालों की न्यायिक लड़ाई के बावजूद 9 नवंबर 2019 को  भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुआई वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से अयोध्या की 2.77 एकड़ की पूरी विवादित जमीन राम मंदिर निर्माण का ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। मंदिर निर्माण के लिए 3 महीने में ट्रस्ट बने और इसकी योजना तैयार की जाए। चीफ जस्टिस ने मस्जिद बनाने के लिए मुस्लिम पक्ष को 5 एकड़ वैकल्पिक जमीन दिए जाने का फैसला सुनाया, जो कि विवादित जमीन की करीब दोगुना है। 6 अगस्त से 16 अक्टूबर तक 40 दिन सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले की सुनवाई की थीl संविधान पीठ द्वारा 45 मिनट तक पढ़े गए 1045 पन्नों के फैसले ने देश के इतिहास के सबसे अहम और एक सदी से ज्यादा पुराने विवाद का अंत कर दिया। चीफ जस्टिस गोगोई, जस्टिस एसए बोबोडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एस अब्दुल नजीर की पीठ ने स्पष्ट किया कि मंदिर को अहम स्थान पर ही बनाया जाए। एक लंबी कानूनी लड़ाई के बावजूद करोड़ों लोगों की आस्था के प्रतीक अयोध्या मंदिर को आखिर में न्याय मिल ही गयाl आज इस मंदिर के निर्माण का जश्न भारत सहित विश्व के बड़े-बड़े शक्तिशाली देशों में भी बनाया जा रहा है जो कि भारत की सदियों पुरानी सभ्यता व संस्कृति को और भी प्रगाढ़ करेगाl


(लेखक के निजी विचार है)
K.S.Thakur

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