वैश्विक महामारी कृषि व्यवस्था



यह लेख हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा 
General Studies Paper - 02, 
Unit -03, Sub - Unit - 03 से संबंधित है
लेख पर आधारित प्रश्न 

1. आत्मनिर्भर हिमाचल प्रदेश में पहाड़ी कृषि व्यवस्था के महत्व की उदाहरण सहित विवेचना करें? 

2. क्या करोना महामारी ने मनुष्य को पुनः कृषि व्यवस्था से जोड़ दिया। विचार व्यक्त करें? 

3. आज का युवा भारत कृषि से क्यों कतराता है?

Corn Plant on Field
आज पूरी दुनिया कोरोना वैश्विक महामारी से जूझ रही हैl सभी व्यवसाय बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं वहीं भारत जैसे कृषि प्रधान देश में कृषि व्यवस्था भारतीय अर्थव्यवस्था लोगों की आजीविका तथा मानव जीवन के उत्थान का एकमात्र सुदृढ़ क्षेत्र बचा हुआ हैl  यह साफ जगजाहिर हो चुका है कि कृषि से ही मानव का उत्थान संभव हैl  चाहे मानना जितनी मर्जी ऊंचाइयों को प्राप्त कर ले लेकिन उसका भरण-पोषण इसी कृषि व्यवस्था से जुड़ा हुआ हैl आज संकटकाल में ग्रामीण क्षेत्रों की कृषि व्यवस्था भारत की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने में सहायक हैl वैश्विक स्तर पर बड़ी-बड़ी अर्थव्यवस्थाए औंधे मुंह पड़ी हैl  वही अर्थशास्त्री भारत की अर्थव्यवस्था को इस बुरे समय में भी 1 या 2 % वृद्धि की उम्मीद लगाए बैठे हैंl इसके पीछे का कारण हमारे ग्रामीण क्षेत्रों की कृषि व्यवस्था हैl  लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था से युवाओं का न जुड़ना व कृषि घाटे का सौदा होना एक बड़ी समस्या हैl

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को जिंदा रखने के लिए गांव में कृषि व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना होगा वर्तमान समय में सूचना प्रौद्योगिकी की पहुंच से जहां मानव जीवन सुगम बना हैI वही दूसरी तरफ किसानी घाटे का सौदा बन गया हैI जब तक ग्रामीण कृषि अर्थव्यवस्था को ईमानदार सरकारी दृष्टिकोण व नीतियों की धरातलीय पहुंच सुनिश्चित नहीं होगी l तब तक कृषि व्यवस्था को नहीं सुधारा जा सकताl हिमाचल प्रदेश में करीब 70% आबादी कृषि व्यवस्था से जुड़ी हुई हैI आबादी पर  अधिकता होने के कारण प्रदेश की कृषि व्यवस्था  को जिंदा रखना जरूरी हैI  इसके साथ-साथ  युवा पीढ़ी को भी कृषि व्यवस्था के नुस्खे सिखाने होंगेI आज की युवा पीढ़ी WhatsApp, Facebook ट्विटर  तथा ट्यूब पर अपना अधिकतर समय व्यतीत करती हैI आज की युवा पीढ़ी कृषि व्यवस्था को हाय तौबा कह रही हैI शारीरिक श्रम युवाओं के गले की फांस बन गया हैI आज की युवा पीढ़ी शारीरिक श्रम करने से कतराती हैI कृषि व्यवस्था शारीरिक श्रम मांगती है तथा बाद में फसल से प्राप्त आय बहुत ही कम प्राप्त होती है जिस कारण से आज का युवा कृषि व्यवस्था से दूर हटता जा रहा हैl प्रदेश में बेरोजगारों की फौज करीब 9 लाख तक पहुंच गई हैI सरकारे जितना मर्जी दावा कर ले लेकिन जब तक युवा पीढ़ी को कृषि व्यवस्था से नहीं जोड़ा जाएगाI तब तक बेरोजगारी की समस्या का समाधान नहीं किया जा सकताl युवा वर्ग को भी यह बात सही ढंग से समझ लेनी चाहिए कि प्राचीन समय से चली आ रही समृद्ध व स्वस्थ कृषि परंपरा का निर्वहन हमें ही करना होगाl कृषि व्यवस्था से ही  हमारी कई पीढ़ियां आगे बढ़ी हैI कोई न कोई ऐसा विशिष्ट व संपन्न गुण इस कृषि व्यवस्था में रहा  होगा जो हजारों वर्षों तक लोगों को कृषि व्यवस्था  से जोड़ने में  सफल रहाI लेकिन अब वह समय आ गयाI जब कृषि का हस्तांतरण आगामी पीढ़ी में नहीं हो रहा है इस बात को समझने की आवश्यकता हैI ऐसी क्या कारण या परिस्थितियां पैदा होगी जो युवा वर्ग कृषि व्यवस्था से मुंह मोड़ रहा हैI
Selective Focus Photography of Wheat Field

आज का युवा चंद रुपयों की नौकरी के लिए निजी कंपनियों का गुलाम बन जाता हैI अधिकतर कंपनियां 5 से ₹10 हजार रुपए में ही युवाओं का श्रम खरीद लेती हैI  घर से कोसों दूर जाकर नौकरी करनी पड़ रही है तथा 10 से 12 घंटे का कठिन परिश्रम भी करना पड़ता हैI यदि युवाओं का सही मार्गदर्शन किया जाए तो उन्हें इस दुर्गम मार्ग पर चलने से बचाया जा सकता हैI युवा समय ही जीवनकाल का सर्वोपरि समय होता हैl युवाओं की इस ऊर्जा का दोहन 5 से ₹10 हजार  रुपए में निजी कंपनी कर लेती हैI इससे कंपनियां मालामाल हो रही है और युवा वर्ग खोखला बनता जा रहा हैI हैरानी की बात तो यह है कि युवा वर्ग निजी कंपनियों में चंद रुपए की नौकरी को भी बड़े शानो-शौकत से करता हैI ऐसी स्थिति में युवाओं का ध्यान कृषि व्यवस्था की ओर अग्रसर करना सरकार के लिए भी बड़ी चुनौती बना हुआ हैI सही मायनों में कृषि व्यवस्था का विश्लेषण किया जाए तो कृषि व्यवस्था का मौसम पर निर्भर रहना, प्राचीन उपकरणों का इस्तेमाल, अंधविश्वासी कृषि व्यवस्था तथा समय पर बीज व खाद इत्यादि का उपलब्ध न होना  ऐसे कारण है जो युवाओं को कृषि व्यवस्था से अलग करते हैंI इस समस्या का योग्य व्यक्तियों द्वारा सही समाधान खोजा जाए तो प्रदेश की माली अर्थव्यवस्था को भी सुधारा जा सकता हैl बढ़ती हुई बेरोजगारी पर भी लगाम कसी जा सकती हैl इसके साथ-साथ बाजार में उपलब्ध खाद्य सामग्री मैं इतनी मिलावटखोरी की जाती हैl जिसका आकलन करना भी मुश्किल हैl यदि युवा वर्ग कृषि व्यवस्था को अपनाएगा तो फलों,सब्जियों व खाद्य पदार्थों की कमी तो दूर होगी तथा मिलावटखोरों से भी बचा जा सकता हैl

प्रदेश सरकार जैविक खेती व्यवस्था को लेकर बहुत सजग दिख रही है लेकिन जब तक युवा वर्ग को जैविक खेती का प्रशिक्षण महत्व नहीं दिया जाएगा  तब तक इस कृषि व्यवस्था की सफलता का आकलन कर पाना मुश्किल होगाl गर्मी का मौसम है, हर व्यक्ति को फलों और सब्जियों की जरूरत पड़ती हैl लेकिन बाजार में उपलब्ध अधिकतर खाद्य सामग्री मिलावट पर जहरीले पदार्थों से भरी हैl सब कुछ जानने के बावजूद भी आज का इंसान उसको खाने के लिए मजबूर हो गया हैl इन जानलेवा समस्याओं का समाधान कृषि व्यवस्था को सुधारने से किया जा सकता हैl सरकार को अपनी नीतियों में कृषि व्यवस्था को लेकर युवाओं को जोड़ना गंभीरता से लेना चाहिएl वर्तमान समय में माननीय मुख्यमंत्री श्री जयराम ठाकुर जी ग्रामीण क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं तथा उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं की अच्छी परख भी हैl कृषि व्यवस्था में युवाओं की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए अपनी योजनाओं में युवा वर्ग को विशेष वरीयता दें तथा सरकार द्वारा संचालित नीतियों में युवाओं की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए कृषि कर्मचारियों व अधिकारियों गांव-गांव में जाकर युवाओं को कृषि व्यवस्था को अपनाने के लिए प्रेरित व प्रशिक्षित करें तथा उनकी समस्याओं का समाधान करेंl इस मुहिम को शुरू करने से युवा वर्ग निश्चित तौर पर कृषि व्यवस्था से जुड़ेगा तथा अपनी बहुमूल्य ऊर्जा को प्रदेश के निर्माण में लगाने में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करेगाl किसान की खुशहाली में ही सब की खुशी है यदि प्रदेश का किसान समृद्ध व खुशहाल बन गया तो प्रदेश की ऋणी अर्थव्यवस्था में भी सुधार होगाl युवाओं को रोजगार मिलेगा, सामाजिक जीवन का स्तर बढ़ेगा तथा प्रदेश आने वाले समय में अग्रणीय राज्यों के रूप में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेगाl सरकार को कृषि उपकरणों पर युवाओं को विशेष सब्सिडी ऑनलाइन व पूर्ण पारदर्शिता के आधार पर वितरित करने की व्यवस्था करनी ताकि ज्यादा से ज्यादा युवा कृषि क्षेत्र में भी अपना सुरक्षित भविष्य बना सकेंl सरकार को कोई ऐसी विशेष योजना खोजनी होगी और ऐसे युवाओं की पहचान करनी होगी जो कृषि व्यवस्था में अपना करियर बनाना चाहते हैं उन्हें विशेष प्रोत्साहन देकर कृषि व्यवस्था से जोड़ना होगाl
(लेखक के निजी विचार है)

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