हिमाचल प्रदेश पंचायती राज


हिमाचल प्रदेश पंचायती राज

Indian Independence must be at the bottom and every village ought to be a Republic with Panchayat, having powers.” - Mahatma Gandhi

"भारतीय स्वतंत्रता को सबसे नीचे होना चाहिए और प्रत्येक गाँव को पंचायत के साथ एक गणराज्य होना चाहिए, जिसमें शक्तियाँ हों।" - महात्मा गांधी

हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज व्यवस्था की स्थापना वैधानिक रूप में हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1952 के प्रावधानों के तहत वर्ष 1954 में हुई।

पंचायती राज अधिनियम 1952 किस में प्रदेश में मात्र 280 ग्राम पंचायतें थी वर्ष 1954 में पंचायतों की संख्या 638 हो गई 1 नवंबर 1966 को पंजाब के पहाड़ी क्षेत्र का विलय हिमाचल प्रदेश में हुआ तथा हिमाचल प्रदेश का क्षेत्रफल 55,673 वर्ग किलोमीटर हो गया तथा पंचायतों की संख्या 1695 तक पहुंच गई।

हिमाचल प्रदेश में दो नगर निगम शिमला तथा धर्मशाला में स्थित है। हिमाचल प्रदेश में इस समय 12 जिला परिषद, 78 पंचायत समिति तथा 3226 ग्राम पंचायतें हैं। हिमाचल प्रदेश पंचायती राज मंत्री श्री वीरेंद्र कंबर है। हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम 1968 को प्रदेश में 15 नवंबर 1970 को लागू किया गया और पूरे राज्य में दो स्तरीय पंचायती राज प्रणाली स्थापित हुई।

वर्ष 2015 में प्रदेश की सभी पंचायतों सहित सभी शहरी निकायों में चुनाव हुए थे, जबकि नगर निगम शिमला का चुनाव 2017 को हुआ था। हिमाचल में 1, 3 और 5 जनवरी को मतदान हुया था।

राज्य चुनाव आयोग के जारी आदेशों के बाद पंचायती राज महकमे ने भी पंचायतों में चुनाव के लिए प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दे दिए हैं। इस संबंध में जिलाधीशों को लिखा गया है कि केवल जिन पंचायतों से कुछ एरिया बाहर की पंचायत समितियों में डाला गया है, उनमें डीलिमिटेशन किया जाए और शेष पंचायतों को न छेड़ा जाए।

इसके अलावा प्रदेश में 12 जिला परिषद और 78 पंचायत समितियां और 3226 ग्राम पंचायतें हैं। प्रदेश में ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों, जिला परिषदों व नगर निकायों में एक साथ चुनाव करवाने से 29324 पदों के लिए चुनाव एक साथ करवाने की तैयारी हो रही है।



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